स्तिथि
यूं तो नहीं कहता नादाँ हूँ में ,
हालत जो हैं बेकाबू उनसे कुछ परेशां हूँ में ,
मजबुरिया नहीं मेरा मुक्कद्दर पर,
अपने आज से हैरान हूँ में !!
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विविधा
कोई कहे गहरा राज़ है तू ,किसी के लिए सजा-संवरा आज है तू ,
कोई कहे बेवफा है तू , कोई कहे उससे खफा है तू ,
किसी के अनसुलझे सवालो का जवाब है तू , किसी की आँखों में बसा हसीं ख्वाब है तू,
मजबूरो के लिए रोज नई मज़बूरी है तू ,थके मुसाफिरों के लिए लम्बी दुरी है तू ,
कोई तुझसे रूठा रहता,कोई तेरे संग-संग बहता,
रंगा हुआ कोई तेरे रंग में-मदमस्त, कोई तुझसे मुहब्बत करता!
तेरी छाँव में बैठा मैं सुकून से, तुझसे ही पूछता-'तू क्या है ? कौन है ?'
ज़िन्दगी ने मेरी मुझसे कहा-
ज़िन्दगी ने मेरी मुझसे कहा-
"मैं तेरी हूँ सिर्फ तेरी!!!"
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कोई तो होगी राह आगे चल के तो देखू;
मशाल न सही पास मेरे, हौसला जला के तो देखू ,
कोई तो होगी राह आगे चल के तो देखू;
मशाल न सही पास मेरे, हौसला जला के तो देखू ,
थमी जरुर हैं रफतार मेरी पर बेकाबू नहीं हैं, मैं चलते-चलते डगर से थोड़ा उड़ कर तो देखू!!
मंजिले और भी हैं,रास्ते न ख़त्म हुए, मैं अपनी जंजीरों का बंधन खोलके तो देखू ,
कहा था ज़िन्दगी ने मैं -'तेरी हूँ,सिर्फ तेरी',
मैं ज़िन्दगी को अपनी, अपना समझ के तो देखू!!!
मैं ज़िन्दगी को अपनी, अपना समझ के तो देखू!!!
Awesome Sushil.... Very different. :)
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